दुःख तो चारों ओर है । गाँव हो या शहर, गरीब हो या अमीर, अनपढ हो या विद्वान, स्त्री हो या पुरुष, जो व्यक्ती विकार जगाता है । वह दुखी हो ही जाता है ।भारत एक ग्रामप्रधान देश है ।

६७ प्रतिशत जनसंख्या ग्रामवासी है । गाँव मे अनेक प्रकार की समस्याएँ होती है जैसे की -

  • तणाव
  • आत्महत्या
  • व्यसनाधिनता
  • महिलाओं और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार
  • अज्ञान
  • अंधश्रद्धा
  • निराशा
  • उदासी
  • चिंता
  • घबराहट
  • उदासीनता

भारत की चौंकाने वाली समस्याएँ ...

  • 1. आनंदी राष्ट्र के क्रम में भारत 140 वे क्रम पर है ।
  • 2. प्रत्येक 10 में से 9 व्यक्ती तणावग्रस्त है ।
  • 3. प्रत्येक 5 व्यक्तीयों में से 1 व्यक्ती निराशाग्रस्त है ।
  • 4. प्रत्येक 4 व्यक्तीयों में से 1 व्यक्ती चिंताग्रस्त है ।
  • 5. 1 घंटे में 16 व्यक्ती आत्महत्या करते है ।
  • 6. प्रतिदिन 848 भारतीय महिलाओं पर अन्याय-अत्याचार तथा बलात्कार होकर उनको मार दिया जाता है ।
  • 7. दहेज प्रथा द्वारा रोज 20 महिलाएँ जान से मारी जाती है ।
  • 8. तंबाकू सेवन से होनेवाले कैंसर से 6 लाख लोग प्रत्येक वर्ष मरते है ।
  • 9. 16 करोड लोग शराब पिते है । 7 व्यक्तियों में से एक व्यक्ती शराब पिता है ।



इन समस्याओं का समाधान क्या है ?

  • 1. २००० वर्ष पूर्व भारत के प्रत्येक गाँव में विपश्यना विद्या फैली हुई थी ।
  • 2. भारत सुखी तथा समृद्ध देश था । भारत को सोने की चिडीया कहा जाता था ।
  • 3. अध्यात्म के क्षेत्र में भारत विश्वगुरु था ।
  • 4. जब भारत में पनघट हो या चौपाल, हर जगह विपश्यना की ही बात होती थी ।



क्या आज भी यह संभव है ?

  • हर एक गांव को आनंदी बनाना है तो हर एक व्यक्ति को आनंदी बनाना चाहिए।
  • आनंदी रहने के लिए हर किसी को खुश रहना चाहिए।
  • मन को प्रसन्नता देने के लिए मन के विकारों को समाप्त करके मन की मनोदशा को बदलना होगा।

ये सभी संभव है आनापान तथा विपश्यना ध्यान साधना द्वारा.



आनंदी गाँव परियोजना के गाँव के कार्यान्वयन के चार स्तर हैं

  • प्रथम स्तर
  • दुसरा स्तर
  • तिसरा स्तर
  • चौथा स्तर

गाँव में कार्यान्वयन की अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें