आनंदी गाँव की संकल्पना कैसे उत्पन्न हुई ?

कावलगाँव ता. पुर्णा जि. परभणी में अनापान तथा विपश्यना से तंम्बाकू मुक्त करने का महाराष्ट्र शासन का प्रकल्प चलाया गया । गाँव में बहुत सारी बाकी समस्याएँ भी थी इसलिए संपूर्ण गाँव को आनंदी ग्राम बनाने की संकल्पना अस्तितव में आयी ।

कावलगांव ता. पूर्णा जि.परभणी तंबाकू मुक्त करने की सरकार की परियोजना | महाराष्ट्र शासन का पहला परिपत्रक |

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क्या आज भी यह संभव है ?

प्रत्येक गाँव सुखी बनाने के लिए हर व्यक्ती का सुखी होना आवश्यक है । प्रत्येक व्यक्ती सुखी बनने के लिए उसका मन सुखी बनना आवश्यक है । मन को सुखी बनाने के लिए मन के विकारों को नष्ट कर मन का स्वभाव बदलना होगा । आनापान व विपश्यना के लिए ग्रामीणों की प्रतिक्रिया बढ़ी और पूरे गांव को आनंदगांव बनाने का संकल्प लिया गया ।

महाराष्ट्र सरकार का दूसरा परिपत्रक

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हाँ संभव है!

ये सभी संभव है आनापान तथा विपश्यना ध्यान साधना द्वारा. पूज्य श्री सत्यनारायण गोयंका गुरुजी कहते है की विपश्यना का डंका बज चुका है । द्वतीय बुद्ध शासन आरंभ हुआ है । विपश्यना विद्या पहले भारत मे प्रतिष्ठापित होंगी और फिर विश्व में फैल जायेगी । आज विश्व के १२५ देशों में विपश्यना विद्या जा चुकी है । विश्व में १९९ विपश्यना के केंद्र है । भारत के शहरों में विपश्यना को लोग भारत के शहरी क्षेत्रों के लोग विपश्यना भली भाँति परिचित है । परंतु बहुत सारे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगोंको विपश्यना इस शब्द की जानकारी भी नही है ।


आनंदी गाँव परियोजना के गाँव के कार्यान्वयन के चार स्तर हैं

  • प्रथम स्तर
  • दुसरा स्तर
  • तिसरा स्तर
  • चौथा स्तर

गाँव में कार्यान्वयन की अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

आनंदी गांव की अधिक जानकारी के लिए नीचे दिया गया वीडियो देखें

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